क्‍या जेटली ने सुषमा को पछाड़ने के लिए सीतारमन को रक्षा मंत्री बनवाया!

by admin on Thu, 09/07/2017 - 10:11

निर्मला सीतारमन के 2010 में भाजपा के प्रवक्ता बनने के बाद चंंद वर्षो  के भीतर ही रक्षा मंत्री पद तक पहुंचने का रहस्य अभी तक सुलझा नहीं है। सीतारमन की पदोन्नति ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी आघात पहुंचाया है। सुषमा ने खुद मोदी को सुझाव दिया था कि रक्षा मंत्रालय एक महिला को दिया जाए। इस संबंध में उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया था। जब मोदी ने सुषमा से पूछा कि रक्षा मंत्रालय किसको सौंपना चाहिए, तो बताया जाता है कि सुषमा स्वराज ने  स्वैच्छिक रूप से साऊथ ब्लाक में जाने की पेशकश की थी। 

उन्होंने सुझाव दिया था कि प्रधानमंत्री विदेश मंत्रालय अपने पास रख सकते हैं और विदेश मंत्रालय में एक अतिरिक्त राज्य मंत्री नियुक्त किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने तब सुषमा को कुछ नहीं कहा। सामान्य तौर पर वाणिज्य मंत्री का काम विदेश मंत्रालय के कामकाज जैसा ही होता है लेकिन मोदी ने निर्मला सीतारमन को रक्षा मंत्री बनाकर राजनीतिक पंडितों के साथ सुषमा स्वराज को भी आघात पहुंचाया। 

सीतारमन को सुषमा स्वराज ही 2006 में भाजपा में लाई थीं और नितिन गडकरी ने भाजपाध्यक्ष रहते हुए उनको 2010 में पार्टी की प्रवक्ता बनाया था। यह विडम्बना ही है कि जब सीतारमन को 2014 में पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में राजस्थान से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाने का प्रश्र आया तो सुषमा ने इस आधार पर उनके नाम को विफल बनाने की कोशिश की कि वह नई हैं और उन्हें कुछ समय इंतजार करना चाहिए लेकिन अरुण जेतली तब एल.के. अडवानी को ‘न्यू टैलेंट’ को आगे लाने में मनाने हेतु सफल रहे। यह पहली बार है कि निर्मला सीतारमन ने सुषमा स्वराज को गच्चा दिया। 

सूत्रों का कहना है कि अरुण जेतली एक महिला नेता को आगे लाने की कोशिश कर रहे हैं जो सुषमा स्वराज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सके। जेतली की स्मृति ईरानी के साथ नहीं बनती और सुषमा के साथ भी उनके रिश्ते ठीक नहीं। जेतली ने सीतारमन को एक सही उम्मीदवार देखा और सुषमा को पछाड़ दिया। अगर भीतरी सूत्रों पर विश्वास किया जाए तो निर्मला को रक्षामंत्री बनाने का फैसला उसी दिन लिया गया था जब वेंकैया नायडू को उप राष्ट्रपति पद के लिए नामित किया गया क्योंकि पार्टी में दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई बड़ा चेहरा नहीं था।

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