प्रयागराज में बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की यूपी सरकार को फटकार, याचिकाकर्ताओं को 10-10 लाख मुआवजा देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार और प्रयागराज विकास प्राधिकरण की खिंचाई करते हुए प्रयागराज में घरों को गिराने की कार्रवाई को ‘अमानवीय और अवैध’ बताया।

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि घरों को गिराने की कार्रवाई ‘‘अनुचित’’ तरीके से की गई। पीठ ने कहा कि ‘‘देश में कानून का शासन है’’ और नागरिकों के आवासीय ढांचों को इस तरह से नहीं गिराया जा सकता।

पीठ ने कहा, ‘‘इसने हमारी अंतरात्मा को झकझोरा है। आश्रय का अधिकार, कानून की उचित प्रक्रिया जैसी कोई चीज होती है।’’

शीर्ष अदालत ने प्राधिकरण को छह सप्ताह के भीतर प्रत्येक मकान मालिक को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने पहले प्रयागराज में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना घरों को गिराए जाने की कार्रवाई पर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की थी और कहा था कि इससे ‘‘खराब और गलत संकेत’’ गया है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा था कि राज्य सरकार ने यह सोचकर गलत तरीके से मकानों को ध्वस्त किया कि यह जमीन गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद की है, जो 2023 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

शीर्ष अदालत अधिवक्ता जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनके मकान ध्वस्त कर दिए गए थे।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तोड़फोड़ की इस कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ताओं को कथित तौर पर प्रयागराज जिले के लूकरगंज में कुछ निर्माणों के संबंध में छह मार्च, 2021 को नोटिस दिया गया था।

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